अध्याय 82

जब कैटनिस को होश आया, तो उसकी नाक में अस्पताल के कीटाणुनाशक की हल्की-सी गंध अटकी हुई थी।

उसकी पलकों पर जैसे किसी ने बोझ रख दिया हो—मानो वे आपस में चिपकी हों। काफी कोशिश के बाद उसने आँखें खोलीं। सामने अस्पताल के कमरे की सादी छत थी, और खिड़की से ढलते सूरज की नरम किरणें छनकर भीतर आ रही थीं।

यादें धीर...

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